प्रकृति-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

प्रकृति-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

ईश्वर का दिया खूबसूरत उपहार प्रकृति
स्वर्ग, श्रृंगार सृष्टि का अलंकार प्रकृति ।।

पेड़ों पर विहंगम चहके, छायी हरियाली
व्योम के खिड़की से झांके सूरज की लाली,
बारिश की थिरकती रिमझिम बूंदे,
कविता लहरें मारे पवन के झोंके
पृथ्वी के गर्भ से निकली फसलें लहराए
फूलों से खुशबू लेकर आये फिजाएं,
सरिता के धुंघराले जुल्फों की कमल शोभा बढ़ायें

ईश्वर का दिया खूबसूरत उपहार प्रकृति
स्वर्ग, श्रृंगार, सृष्टि का अलंकार प्रकृति ।।

झरनों की मुस्कराहट पर बिजली गिराये
उथल पुथल करें सावन
सरिता सरगम गाये
देश का प्रहरी हिमालय प्यारा
धरती पर टिका जग सारा,
न करें भेदभाव किसी से
स्वर्णिम साहित्य ओंस के मोती लुटाए,
शिखरों से बहती दूध की धारा
अंबर को अलंकृत करता चांद तारा,

ईश्वर का दिया खूबसूरत उपहार प्रकृति
स्वर्ग, श्रृंगार, सृष्टि का अलंकार प्रकृति ।।

 

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