प्रकाशित खड़ा है-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

प्रकाशित खड़ा है-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

प्रकाशित खड़ा है
पारदर्शी दिन
तेजस्वी सूर्य का सिर
ऊपर उठाए
चराचर सृष्टि को
चिन्मय बनाए
मुझे
आत्मीय भाव से
अपनाए।

रचनाकाल: १६-०९-१९९१

 

Leave a Reply