प्यास की कैसे लाए ताब कोई-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar 

प्यास की कैसे लाए ताब कोई-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

प्यास की कैसे लाए ताब कोई
नहीं दरिया तो हो सराब कोई

ज़ख़्म दिल में जहाँ महकता है
इसी क्यारी में था गुलाब कोई

रात बजती थी दूर शहनाई
रोया पीकर बहुत शराब कोई

दिल को घेरे हैं रोज़गार के ग़म
रद्दी में खो गई किताब कोई

कौन-सा ज़ख़्म किसने बख़्शा है
इसका रक्खे कहाँ हिसाब कोई

फिर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की
आनेवाला है फिर अज़ाब कोई

शब की दहलीज़ पर शफ़क़ है लहू
फिर हुआ क़त्ल आफ़्ताब कोई

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