प्यारा सा गांव-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

प्यारा सा गांव-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

दूर कहीं एक आम की बगिया
बगिया में है ठंडी छांव
छांव में एक कच्चा रस्ता
रस्ते में प्यारा सा गांव
गांव में एक छोटा सा घर
घर में एक उजला सा आंगन
आंगन में चन्दन का पलना
पलने मे चंदा सा मुन्ना
मुन्ने की आंखों में निंदिया
दूर कहीं इक…

नीले-नीले आसमान में
तारों का है एक नगर
जगमग-जगमग इक तारे पर
एक शहज़ादी का है घर
चुपके-चुपके रात को उठ के
ध्यान से देखे कोई अगर
झिलमिल-झिलमिल है तारे में
उस शहज़ादी के ज़ेवर
शहज़ादी इठलाये, शहज़ादी यह गाये
दूर कहीं एक…

आधी रात जब हो जाती है
जब दुनिया सो जाती है
तारों से शहज़ादी उतर के
मुन्ने के घर आती है
मीठे-मीठे सारे सपने
अपने साथ वो लाती है
सोते मुन्ने की पलकों पे
ये सपने वो सजाती है
सिरहाने वो आये, हौले से वो गाये
दूर कहीं एक…

(ज़ुबैदा)

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