प्यारा वतन होगा-नानक सिंह -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nanak Singh

प्यारा वतन होगा-नानक सिंह -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nanak Singh

जब अपना बागबां होगा चमन अपना चमन होगा।
तो फिर फसले बहार आएगी पहला सा चमन होगा।

मनाही फिर न होगी बुलबुलों को चहचहाने की,
जुबां अपनी जुबां होगी दहन अपना दहन होगा।

गुलामी की कटेंगी बेड़ियां सारी मगर उस दिन,
निछावर जब वतन पे अपना तन-मन और धन होगा।

निकल जाएगा जिस दिन खौफ दिल से जान जाने का,
शहादत को झुकी गर्दन बंधा सिर पर कफन होगा।

अगर हम हुक्म गांधी पर रहे आए कमर बस्ता,
रिहा सय्याद के पंजे से फिर प्यारा वतन होगा।

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