पेड़ो से फूल निकलते-प्रशांत पारस-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Prashant Paras

पेड़ो से फूल निकलते-प्रशांत पारस-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Prashant Paras

पेड़ो से फूल निकलते,
तितलियाँ उनपर मंडराते, भौरों को उनपर उड़ते,
ख़ुशी से फूल को ऐठते,
मैंने देखा है।
लगी थी एकमात्र फूल पेड़ पर,
खुशी से झूम रहा था पेड़ भी, पेड़ को इतराते,
फूल को खिलखिलाते,
मैंने देखा है।
आखिर किसकी नजर, लगी इस ख़ुशी को,
आ अचानक एक दिन, निचे वो फूल गिरा,
फूल से बिछड़ने पर, पेड़ का दू:ख,
मैंने देखा है।
पैँरो तले रौंदा वो फूल जाने लगा,
अपनी बदकिस्मती पर,
रोते फूल को,
मैंने देखा है।
अगली सुबह हुई, निकली एक फूल नयी,
पेड़ सोच बैठा था नहीं हसूँगा, दोबारा कभी,
क्योकि फूल से बिछड़ने पर, खुद का दुख,
मैंने देखा है।

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