पेखत पेखत जैसे रतन पारुखु होत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

पेखत पेखत जैसे रतन पारुखु होत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

पेखत पेखत जैसे रतन पारुखु होत
सुनत सुनत जैसे पंडित प्रबीन है ।
सूंघत सूंघत सौधा जैसे तउ सुबासी होत
गावत गावत जैसे गायन गुनीन है ।
लिखत लिखत लेख जैसे तउ लेखक होत
चाखत चाखत जैसे भोगी रसु भीन है ।
चलत चलत जैसे पहुचै ठिकानै जाय
खोजत खोजत गुरसबदु लिवलीन है ॥५८८॥

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