पूर्ण होकर रुदन भी युग-गान बनता है-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

पूर्ण होकर रुदन भी युग-गान बनता है-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

पूर्ण होकर रुदन भी युग-गान बनता है,
मधुरतम गान बनता है ।

जब ह्रदय का एक आँसू
सब समर्पण भाव लेकर,
नयन-सीपी में उतर कर,
अर्चना का अर्घ्य बनता,
एक क्षण पाषाण भी भगवान बनता है,
मधुरतम गान बनता है ।

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