पुरबिया सूरज-सुदामा पाण्डे का प्रजातंत्र-मादा कविताएँ-सुदामा पांडेय धूमिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sudama Panday Dhoomil

पुरबिया सूरज-सुदामा पाण्डे का प्रजातंत्र-मादा कविताएँ-सुदामा पांडेय धूमिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sudama Panday Dhoomil

पुरबिया सूरज
एक लम्बी यात्रा से लौट
पहाड़ी नदी में घोड़ों को धोने के बाद
हाँक देता है काले जंगलों में चरने के लिए
और रास्ते में देखे गए दृश्यों को
घोंखता है ।

चांद

पेड़ के तने पर चमकता है
जैसे जीन से लटकती हुई हुक
और रेवा के किनारे

मैं द्रविड़ की देह से बहता लहू हूँ
मैं अनार्यो का लहू हूँ
नींद में जैसे
छुरा भोंका गया ।

Leave a Reply