पुजारिन कैसी हूँ मैं नाथ-एकायन-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

पुजारिन कैसी हूँ मैं नाथ-एकायन-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

पुजारिन कैसी हूँ मैं नाथ!
झुका जाता लज्जा से माथ!
छिपे आयी हूँ मन्दिर-द्वार छिपे ही भीतर किया प्रवेश।
किन्तु कैसे लूँ वदन निहार-छिपे कैसे हो पूजा शेष!
दया से आँख मूँद लो देव! नहीं माँगूँगी मैं वरदान,

तुम्हें अनदेखे दे कर भेंट-तिमिर में हूँगी अन्तर्धान।
ध्यान मत दो तुम मेरी ओर-न पूछो क्या लायी हूँ साथ!
गान से भरा हुआ यह हृदय-अघ्र्य को चित-तत्पर ये हाथ!
पुजारिन कैसी हूँ मैं नाथ!

Leave a Reply