पुछन गल ईमान दी काज़ी मुलां इकठे होई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

पुछन गल ईमान दी काज़ी मुलां इकठे होई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

पुछन गल ईमान दी काज़ी मुलां इकठे होई ॥
वडा सांग वरतायआ लख न सके कुदरति कोई ॥
पुछन खोल किताब नूं वडा हिन्दू की मुसलमानोई ॥
बाबा आखे हाज़ियां शुभ अमलां बाझो दोवें रोई ॥
हन्दू मुसलमान दोइ दरगह अन्दर लैन न ढोई ॥
कचा रंग कुसुंभ का पानी धोतै थिर न रहोई ॥
करन बखीली आप विच राम रहीम कुथाय खलोई ॥
राह शैतानी दुनिया गोई ॥33॥

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