पीपल, मानव से-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

पीपल, मानव से-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

 

तुम हेमसुंदरी पाकर भी
सुख से न रह सके, रे मानव!
मैं निर्जन जंगल में एका
पत्तों को लेकर चलता हूं।

तुम शिखर छू रहे पर्वत की
मेरे पथ की कोई दिशा नहीं
मैं पीपल वृक्ष हूं ठहरा हुआ
आह्लादित, हिलता डुलता हूं।

तुम हो ज्ञानी, तुम बुद्धिमान
तुम नष्ट मुझे कर सकते हो
फिर भी छाया देता तुमको
नहीं अपना रूप बदलता हूं।

मानव! मानव तुम रहे बहुत
पर कभी शांति नहीं मिली
बन जाओ प्रकृति आनंदित हो
यह बात तुम्हें मैं कहता हूं।

 

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