पीपल की प्रतीक्षा-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

पीपल की प्रतीक्षा-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

प्रतीक्षा तो केवल पीपल ही करता है
उस पर बंधे मनौतियों के धागों के खुलने की
ससुराल को विदा होती बेटियों के
सावन में घर लौटने की
परदेस में रोटी कमाने गये
जवानों के घरों तक मनीऑर्डर पहुंचने की
देश की सरहद पर गए
गांव के फौजी बेटों की
चिट्ठी संदेशों के आने की
उसकी छांव में लगी पाठशाला में पढ़ाए
पाठों के सफल हो जाने की
शहर को पढ़ने गए बच्चों के
उसी छांव में एक दिन वापिस लौट आने की
हर शाम बच्चों के संग लुका छिपी खेलने की
उसकी नई पत्तियों के फूटने पर
खिली कविताओं के
अमरत्व को प्राप्त हो जाने की
उसके तने पर खुदरी, प्रेम में भरी गयी
दर्जनों हामियों के
अविस्मरणीय प्रेम कथा बन जाने की
फ़िर एक दिन किसी महापुरुष के
उसके नीचे बैठकर ज्ञान प्राप्त करके,
“बुद्ध” बन जाने की..!!

 

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