पीठ पीछे लौटता है कोई-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

पीठ पीछे लौटता है कोई-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

पीठ पीछे लौटता है कोई।
पीठ पीछे दौड़ता है कोई।

न जाने हममें क्या देखा है।
पीठ पीछे भौंकता है कोई।

गड़गड़ाती बरसाती रात में।
पीठ पीछे कौंधता है कोई।

चलता हूं अपनी मस्ती में।
पीठ पीछे चौंकता है कोई।

मुख पे कभी कह न पाता।
पीठ पीछे बोलता है कोई।

दुम हिलाता चाकरी करता।
पीठ पीछे डौलता है कोई।

जहर जिंदगी के बर्तन में।
पीठ पीछे घोलता है कोई।

खंज़र सब के हाथों में है।
पीठ पीछे घौंपता है कोई।

चुगली का ईंधन आग मे।
पीठ पीछे झोंकता है कोई।

हाथी की चाल में मस्ती है।
पीछे पीछे मोड़ता है कोई।

सामने सब सच्चे अच्छे हैं।
पीठ पीछे टोकता है कोई।

सोहल ठण्डी रख हरदम।
पीठ पीछे खौलता है कोई।

 

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