पाय लाग लाग दूती बेनती करत हती-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

पाय लाग लाग दूती बेनती करत हती-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

पाय लाग लाग दूती बेनती करत हती
मान मती होइ काहै मुख न लगावती ।
सजनी सकल कह मधुर बचन नित
सीख देति हुती प्रति उतर नसावती ।
आपन मनाय प्र्या टेरत है प्र्या प्र्या
सुन सुन मोन गह नायक कहावती ।
बिरह बिछोह लग पूछत न बात कोऊ
ब्रिथा न सुनत ठाढी द्वारि बिललावती ॥५७५॥

This Post Has 2 Comments

Leave a Reply