पायदान-गीत-अगीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj 

पायदान-गीत-अगीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

निर्मम पदाघात,
मिट्टी,
धूल,
कीचड़,
सभी कुछ धारण किया वक्ष पर
बिना प्रतिवाद;
(ताकि)
स्वच्छ रहे आँगन,
निरोग रहे कक्ष
जहाँ पल रहे हैं, सपने
… जिन्हें कहते हैं भविष्य ।
फिर भी
मुझे जगह मिली बाहर
देहरी के पास,
जहाँ शायद ही पहुंचे कभी
घर में महकती चमेली की सुवास ।

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