पाकिस्तान-प्रहरी : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

पाकिस्तान-प्रहरी : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

सरहदों के जुल्म से न
विश्व अब अनजान है,
सैनिकों को मारना –
मरना तेरी पहचान है।

क्रूरता की हर हदों को
पार करता जा रहा,
शूर का शोणित बहे
न देश को जाता सहा।

छत-विछत तन देखकर
है धैर्य सबका टूटता,
क्रोध की अग्नि धधकती
ज्वाल रह-रह फूटता।

जानता हूँ पाक तेरी
शक्ति, क्या औकात है,
चीन से मिलता हुआ
जो अस्त्र की सौगात है।

याद रख उस रात को
जब घुस जलाये थे तुझे,
मौत की चिर नींद में
हमने सुनाये थे तुझे।

चाहता मरना हमारे
हाथ से, तो ठीक है,
याद रख पर सैन्य बल
इस देश का प्रतीक है।

है अमित बल बाजुओं में
फाड़ दूँ तेरे वतन को,
मौत का व्यापार जो करते
तुम्हारे उन रतन को।

हर तरफ फिर कायरों की
भीड़ में चीत्कार होगा,
तू न होगा इस धरा पर
शून्य का आकार होगा।

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