पहुँचे बहुत दूर हम चलके ।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

पहुँचे बहुत दूर हम चलके ।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

भव के पार कई पहचाने
जो नूतन थे हुए पुराने,
जिन मोड़ों से था रिश्ता अब
लगते वही दूर अनजाने।
अगणित दीप बुझे हैं जलके
पहुँचे बहुत दूर हम चलके ।

बीते दिन के धुंधले चेहरे
रात जगाते हैं भिनसहरे,
यादों के सपने लहराते
जैसे होते सागर गहरे।
भावविभोर करें क्षण कल के
पहुँचे बहुत दूर हम चलके ।

वो गलियाँ, वह राह निराली
स्नेह – सुधा बरसाने वाली,
अपनापन से भरा हुआ वह
आँगन कितना खाली – खाली।
कहाँ गये वो दिन अब ढलके
पहुँचे बहुत दूर हम चलके ।

 

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