पहिलां मासहु निमिआ मासै अंदरि वासु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

पहिलां मासहु निमिआ मासै अंदरि वासु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

पहिलां मासहु निमिआ मासै अंदरि वासु ॥
जीउ पाइ मासु मुहि मिलिआ हडु चमु तनु मासु ॥
मासहु बाहरि कढिआ ममा मासु गिरासु ॥
मुहु मासै का जीभ मासै की मासै अंदरि सासु ॥
वडा होआ वीआहिआ घरि लै आइआ मासु ॥
मासहु ही मासु ऊपजै मासहु सभो साकु ॥
सतिगुरि मिलिऐ हुकमु बुझीऐ तां को आवै रासि ॥
आपि छुटे नह छूटीऐ नानक बचनि बिणासु ॥१॥(1289)॥

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