पहाड़ों में पहाड़ हबै ले मजबूत-पहाड़ी भाषा काव्य-श्याम सिंह बिष्ट -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shyam Singh Bisht 

पहाड़ों में पहाड़ हबै ले मजबूत-पहाड़ी भाषा काव्य-श्याम सिंह बिष्ट -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shyam Singh Bisht

पहाड़ों में पहाड़ हबै ले मजबूत, क्षू मयर पहाड़ी ईजा
सुरज हबै ले जौ पाली, उठ जी यस छू मयर ईजा
गोर, बकर,बलद, सबूक, धयान रखी मयर ईजा
आप लिजि खाल भान, हमूग, पेट, भर बै दि मयर ईजा
बाजुयक हबै चोर बै,पैस दि हमगु मयर ईजा
आप लिजि खाली हाथ, हमें लिजि बैग भर लि मयर ईजा
कभत जंगल, कभत खेत
दिन भर काम पै लाग रि मयर ईजा
कभत हाथम दातूल, कभत कूटव
मूनवम जैक हमेशा बवज रू, यस छू मयर ईजा
आपण दुखम रबेर, हमार सूख खयाल धरि मयर ईजा
हमार लिजि भगवान जो,मागी, यस छू मयर ईजा
चयल, चैल, में जो भेदभाव,नि धरन यस छु मयर ईजा
ममता, बलिदान, जिमैदारी, मूरत छु मयर ईजा
आपु लिजि पतझड़ हमें लिजि दिवाई त्योहार छू मयर ईजा
पहाड़ों में पहाड़ हैबे ले मजबूत छू मयर ईजा ।

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