पहली बार-कहें केदार खरी खरी-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

पहली बार-कहें केदार खरी खरी-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

अब
इस बार
पहली बार
सिंह और पंडित की
वर्ण-माला तोड़ी गई,
तपे हुए लोहे को
चुना गया
लोकसभा का चुनाव
लड़ने को।
चक्कर
मक्कारों का नहीं चला
शोषक श्रीमंतों का
दाँव भी नहीं चला,
ऊँचे अब
नीचे हुए
पानी बिना सूखे हुए

रचनाकाल: १७-०२-१९७७

 

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