पहलां बाबे पाया बखश दर पिछों दे फिर घाल कमाई ॥ -बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

पहलां बाबे पाया बखश दर पिछों दे फिर घाल कमाई ॥ -बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

 

रेत अक्क आहार कर रोड़ां की गुर करी विछाई ॥
भारी करी तप्पस्या बडे भाग हरि स्युं बनि आई ॥
बाबा पैधा सच खंड नानिधि नाम गरीबी पाई ॥
बाबा देखे ध्यान धर जलती सभ प्रिथवी दिस आई ॥
बाझहु गुरू गुबार है हैहै करदी सुनी लुकाई ॥
बाबे भेख बणायआ उदासी की रीत चलाई ॥
चड़्हआ सोधन धरत लुकाई ॥24॥

Leave a Reply