परिचय…-किस करवट जीवन -राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

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प्रेम-प्रसंग नैसर्गिक हैं. उनके दो पात्र भी सृष्टि-स्वरुप हैं. लेकिन इन
पात्रों के चरित्र स्वयंभू हैं. इसमें ईश्वर का अधिक हाथ नहीं है.
जब धीरे-धीरे सहभागिता बूढी होने लगती है, जीवन में नये आभास
होते हैं. तृष्णा-वितृष्णा, मान-अपमान, और सुख-दुःख के
अप्रत्याशित अनुभव होते है. पुरुष कभी पशु तो कभी वस्तु सा लगता
है. सच तो यह है कि सुख का कोई मानदंड नहीं है. केवल अपने कर्म
और भाग्य हैं.
इस काव्य संग्रह में दो लंबी रचनाएँ हैं – किस करवट जीवन और
प्रणय परिक्रमा. दोनों ही रचनाएँ यथार्थ से जुडी हैं.
राजगोपाल
अप्रैल-मई २०२०

 

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