परहरि काम क्रोधु झूठु निंदा-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

परहरि काम क्रोधु झूठु निंदा-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

परहरि काम क्रोधु झूठु निंदा तजि माइआ अहंकारु चुकावै ॥
तजि कामु कामिनी मोहु तजै ता अंजन माहि निरंजनु पावै ॥
तजि मानु अभिमानु प्रीति सुत दारा तजि पिआस आस राम लिव लावै ॥
नानक साचा मनि वसै साच सबदि हरि नामि समावै ॥2॥141॥

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