परस तो गए- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

परस तो गए- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

आये तो तुम
थोड़ा बरस तो गये!
तरसे इन नयनों को
आह! बड़े हौले
परस तो गये।
प्राणों के तन्तु
कली बन खिले तो नहीं
पर तनिक सिहर
हरस तो गये।
घुटन कुछ गली
गाँठ मन की
कुछ सरकी
खुली नहीं, पर ढिली,
भाव थरथराये,
डर दरका भीतर के पंछी ने
पर तौले उद्ग्रीव हुआ,
उड़ा तो नहीं, पर क्षितिज पर
उसे तुम परस तो गये।
आये तो तुम, थोड़ बरस तो गये।

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