परमात्मा की याद- कविता (धार्मिक)-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi 

परमात्मा की याद- कविता (धार्मिक)-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

इस अर्ज़ो-समां के अर्से में यह जितना खच्चम खच्चा है।
यह ठाठ तुझी ने बांधा है, यह रंग तुझी ने रच्चा है।
हैवान, पखेरू, नर नारी, क्या बूढ़ा बालक बच्चा है।
क्या दाना बीना भरा, क्या भोला नादां कच्चा है।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥1॥

कोई ख़ालिक बारी रब मौला रहमान रहीम अल्लाह तँगरी ।
कोई अलख रूप करतार कहे निरकाल नाम धरी।
कोई राम राम कहकर सुमरे कोई बोले शिव शिव हरी हरी।
कोई दाना दीनत, देव अटल, कोई राक्षस देवत जिन्न परी।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥2॥

दरियाओ समुन्दर झील नहर नद्दी नाले डबरे जौहर।
सीपी, घोंघे, कौड़ी, मोती, घड़ियाल और नाके, सोंस, मगर।
जोंके, भैंसे, गोहें, झींगे, मुर्गाबी, बत्तख, बैल अम्बर।
क्या लाची, परवी और भँवर, क्या कछ, मछ और क्या जी जन्तर।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥3॥

फुलवारी, बाड़ी, बाग़, चमन है सबको याद तेरी ही भली।
तू माली, वाली, रखवाली क्या बिरछ फली क्या पेड़ बली।
कोई माला फेरे, कोई सुमिरन है सबके दिल में याद घुली।
क्या चोटी, जड़, क्या फल, कोपल, क्या टहनी पत्ता कली-कली।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥4॥

हुशियारी दाना मस्त सटर अग़यार नज़र, नाक़िस क़ामिल।
सरदार ग़रीब अदना आला ज़ीरक सियाना नादां ग़ाफ़िल।
रम्माल नजूमी घड़ियाली मुल्ला ब्राह्मन पंडित आक़िल।
क्या बंद महनदस अब्जद दां, क्या आलिम फ़ाज़िल क्या जाहिल।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥5॥

सैयाद सवाबित लौहो क़लम जिन्नात अदन फ़िर्दोस फ़लक।
ख़ुर्शीद से ले महताब तलक महताब से ले ख़ुर्शीद तलक।
आसार तबाएँ क़ोसोजदी मीज़ाने असद सर्तान हरयक।
क्या रिज्वां ग़िल्मां जन्नत के क्या अर्श बरी क्या हूरो-मलक।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥6॥

है दश्त बयाबां और वादी अर्सा मैदाँ सहरा जंगल।
वीराना पर्वत झाड़, शजर बूटी, झाड़ी पेड़ और जबल।
पीलू, पाखर, नरमा, सेंभल, कचनार, संभालू, बड़, पीपल।
क्या अब्र हवा, क्या बर्क़ घटा, क्या दल बादल क्या जल और थल।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥7॥

राबेल, नगेर और मौलसिरी, मद मालति बेला और समन।
दोपहरी, गेंदा, गुललाला नाफ़रमा करना, बान मदन।
जाई, जुई, शब्बो नरगिस, सिंगार चमेली सीम-बदन।
क्या फूल गुलाबी गुलतूर्रा क्या डेला बांसा सुख दर्सन।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥8॥

अंगूर, संगतरा, नारंगी, बरसेव सदाफल, सीताफल।
नारंज झम्बेली और कोले खट्टे मीठे कमरख गुलगुल।
आम, इमली, जामुन, मल्लकरी बादाम, छुहारे और जाफल।
क्या गूलर, खट्टे, मौलसिरी क्या शफ़तालू क्या कटहल, बड़हल।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥9॥

गुढ़पंख कुलंग और बारकोई सारस, बगुला, कोयल, तीतर।
सुरखाब तरमती ज़ाग़ो ज़ग़न सीमुर्ग़ और सारस, मोर, सफ़र।
बहरी, लग्घड़, तोता, मैना, हुद-हुद, शिकरे, बाशे, तीतर।
क्या बुलबुल, कुमरी, लाला बया, क्या मक्खी, भुनगा और मच्छर।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥10॥

गज, गेंडा, अरना शेर पिलंग आहू हिरनी रोब गीदड़।
सीपी न्योला, साँड़ा, बिच्छू, अफ़ई, चीतल चित्ती, अज़दर।
कज, कूही, पाढ़ा गर्ग चरख़, गिरगिट चलपा सेब मूशोदिगर।
क्या जल मानस, क्या बन मानस, क्या हाथी, घोड़ा पील शुतर।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥11॥

अब्दाल कुतुब और ग़ौस वली है ध्यान में तेरे दिल सबका।
क्या ज्ञानी, ध्यानी, नारद मुनि क्या जोगी जंगम गुरु चेला।
तू पालने वाला है सबका और सबका तुझसे ध्यान लगा।
क्या शाह ‘नजीर’ और क्या राजा क्या मुफ़लिस क्या कंगाल गदा।
कुल आलम तेरी याद करे तू साहब सबका सच्चा है॥12॥

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