पयामे-वफ़ा-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

पयामे-वफ़ा-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

हो चुकी क़ौम के मातम में बहुत सीनाज़नी
अब हो इस रंग का सन्यास ये है दिल में ठनी
मादरे-हिन्द की तस्वीर हो सीने पे बनी
बेड़ियाँ पैर में हों और गले में क़फ़नी
हो ये सूरत से अयाँ आशिक़े-आज़ादी है
कुफ़्ल है जिनकी ज़बाँ पर यह वह फ़रियादी है

आज से शौक़े वफ़ा का यही जौहर होगा
फ़र्श काँटों का हमें फूलों का बिस्तर होगा
फूल हो जाएगा छाती पे जो पत्थर होगा
क़ैद ख़ाना जिसे कहते हैं वही घर होगा
सन्तरी देख के इस जोश को शरमाएँगे
गीत ज़ंजीर की झनकार पे हम गाएँगे

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