पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये !

कुंज-कुंज झूम उठे, बजी भृंग-शहनाई,
पात-पात थिरक उठे, डार-डार बौराई,
गुंथे कोटि-कोटि हार पिया नहीं आये!
पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये !

घर आई पुरवाई, अकुलाई सेज-सेज,
शरमाई बादल को पत्र धरा भेज-भेज,
उत्तर पर दूर पार पिया नहीं आये!
पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये !

रेशम के रस-हिंडोल गली-गली झूले,
मेघन के गीत फूल कंठ-कंठ फूले,
गूँजी दिशि-दिशि मल्हार पिया नहीं आये!
पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये !

घुमड़-घुमड़ गरजे घन, उमड़-उमड़ आये मन,
सिसक-सिसक उठे साँस, बरस-बरस पड़े नयन
भीग गये द्वार-द्वार पिया नहीं आये!
पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये !

बिखर गई स्वप्न-माल, झरी अश्रु लड़ी-लड़ी,
खिड़की पर रात-रात बूँद जगी खड़ी-खड़ी,
घड़ी-घड़ी इन्तजार पिया नहीं आये!
पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये !

गगन बना कृष्ण और प्रकृति बनी राधा
यमुना-तट रास रचा कौन द्वैत-बाधा,
मेरा सूना सिंगार पिया नहीं आये !
पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये !

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