पद-भक्त रामानन्द जी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhakt Ramanand Ji

पद-भक्त रामानन्द जी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhakt Ramanand Ji

हरि बिन जन्म वृथा षोयो रे ।
कहा भयो अति मान बड़ाई, धन मद अंध मति सोयो रे ।
अति उतंग तरु देषि सुहायो; सैबल कुसुम सूवा सेयो रे ॥
सोई फल पुत्र कलत्र विषै सुष, अंति सीस धुनि धुनि रोयौ रे ।
सुमिरन भजन साध की संगति, अंतरि मन मैल न धोयौ रे ॥
रामानंद रतन जम त्रासैं श्रीपति पद काहे न जोयौ रे ॥१॥

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