पंजाबी कविता(पदे)-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand 2

पंजाबी कविता(पदे)-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand

आपे मेलि लई जी सुन्दर शोभावंती नारी

आपे मेलि लई जी सुन्दर शोभावंती नारी
करि क्रिपा सतिगुरू मनायआ लागी शहु नूं पयारी
कूड़ा कूड़ ग्या सभ तन ते, फूल रही फुलवारी
अंतरि साच निवास किया, गुर सतिगुर नदरि नेहारी
शबद गुरू के कंचन काया, हउमै दुबिधा मारी
गुन कामन करि कंतु रीझाया, सेवा सुरति बीचारी
दया धारि गुर खोल्ह दिखाई, सबद सुरति की बारी
गयान राउ नित भोग कमावै, कायआ सेज सवारी
भटक मिटी गुरसबदी लागे, लीनो आपि उबारी
दास चन्द गुर गोबिन्द पाया, चिंता सगलि बिसारी

सज्जन ! झात झरोखे पाईं

सज्जन ! झात झरोखे पाईं
मैं बन्दी बिन दाम तुसाडी, तू सज्जन तू साईं
दर तेरे वल झाक असाडी, भोरी दरसु दिखाईं
तू दिल महरम सभ किछ जाणैं, कैनूं कूक सुणाईं
तिन्हां नालि बराबरि केही, जो तेरे मन भाईं
थीवां रेनु तिना बलेहारी, निव निव लागां पाईं
जहं जहं देखां सभ ठां तूं हैं, तूं रव्या सभ ठाईं
भोरी नदरि नेहाल प्यारे, सिकदी नूं गलि लाईं
पल पल देखां मुख तुसाडा, ‘चन्द’ चकोर न्याईं
गोबिन्द ! दया करहु जन ऊपरि, वारि वारि बल जाईं ।

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