पंखिया-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

पंखिया-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

क्यूं न झमक कर करे जलवा गरी पंखिया।
कुछ कफ़ेनाजुक परी, कुछ वह परी पंखिया॥
देख चमन में सहर, इसकी जबी पर अर्क़।
लाई उधर से नसीम, इत्र भरी पंखिया॥
शाख़ ने गुल की इधर बर्ग जो थी सब्ज तर।
उनकी बनाकर झली उसको हरी पंखिया॥
गर्मी में एक दिन गये उससे जो मिलने को हम।
छोटी सी आगे थी एक उसके धरी पंखिया॥
हम थे पसीने में तर, बैठते ही यक बयक।
हाथ बढ़ाकर जो लीं, उसकी ज़री पंखिया॥
उसने वहीं छीन ली और यह कहा वाह वाह।
तूने छुई क्यूं मेरी, जेब भरी पंखिया॥
कुछ थी अर्क़ की तरी, कुछ हुई खि़जलत “नज़ीर”।
और तरी के ऊपर लाई तरी पंखिया॥

 

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