न शान्ति के लिए मचल-आद्यन्त -धर्मवीर भारती-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dharamvir Bharati

न शान्ति के लिए मचल-आद्यन्त -धर्मवीर भारती-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dharamvir Bharati

न शान्ति के लिए मचल
जल निशा प्रदीप जल !
जल कि काली मौत वाली रात को जला !
जल कि खुद परवाना बनकर सूरज तुझ पर मँडराये
तेरी एक जलन में विहँसें सौ विहान उज्ज्वल !
जल शिक्षा प्रदीप जल !!
जिन्दगी की रात में मत प्रेत बन कर घूम
पतझड़ों में झूम
पीली-पीली पत्तियों के मुर्दा होठ चूम
धीमे से उन पर उढ़ा दे मौत का झीना कफ़न
किन्तु फिर उन पर सिसक कर मत तू मिट जा धूल में
जल उठ खिल उठ मेरे दीपक, जिन्दगी के फूल में
इस दुनिया की डालियों में
इन घुटती आँधी मालियों में
बन बसन्ती आग तू सुलगा दे जलती कोपलें
जिन्दगी की कोपलें
जिन्दगी है मेरे साथी-मरने की कला !
जल कि काली मौत वाली रात को जला !!!

Leave a Reply