न वो सिन है फ़ुर्सत-ए-इश्क़ का-ग़ज़लें -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

न वो सिन है फ़ुर्सत-ए-इश्क़ का-ग़ज़लें -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

न वो सिन है फ़ुर्सत-ए-इश्क़ का, न वो दिन हैं कशफ़-ए-जमाल के
मगर अब भी दिल को जवाँ रखे, के मुद्दे ख़त-ओ-ख़ाल के

ये तो गर्दाब-ए-हयात है, कोई इसकी जब्त से बचा नही
मगर आज तक तेरी याद को मैं रखूं सम्हाल-सम्हाल के

मैं अमीन-ओ-कद्र शनाज़ था, मुझे साँस-साँस का पाज़ था
ये जबीं पे हैं जो लिखे हुए ये हिसाब हैं माहो साल के

शब-ए-तार न डरा मुझे ए ख़ुदा जमाल दिखा मुझे
कि तेरे सबूत है बेशतर्, तेरी शान है ज़ाह-ओ-ज़लाल के

कोई “कोहकन” हो,कि “कैस” हो, कोई “मीर” हो, कि “नदीम” हो
सभी नाम एक ही शख़्स के, सभी फूल एक ही डाल के

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