न रही ताब-ओ-न तवां बाकी-बहादुर शाह ज़फ़र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bahadur Shah Zafar

न रही ताब-ओ-न तवां बाकी-बहादुर शाह ज़फ़र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bahadur Shah Zafar

न रही ताब-ओ-न तवां बाकी
है फ़्कत, तन में एक जां बाकी

शमा-सा दिल तो जल बुझा लेकिन
है अभी दिल में कुछ धुआं बाकी

है कहां कोहकन, कहां मजनूं
रह गया नामे-आशिकां बाकी

ख़ाके-दिल-रफ़तगां पे रखना कदम
है अभी सोज़िशे-नेहां बाकी

कारख़ाने-हयात से तबे-ज़ार
है मगर गरदे-कारवां बाकी

दम-ए-उल्फ़त है ज़िन्दगी मेरी
वरना है मुझ में वो वहां बाकी

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