न पूछ क्या काम कर गई है-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

न पूछ क्या काम कर गई है-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

न पूछ क्या काम कर गई है
दिलो-नज़र में उतर गई है
तेरी नज़र सब को आज़माए,
तेरी नज़र कौन आज़माए

शिगुफ़्ता दिल को न कर सकेगा,
रुका-रुका ज़ेरे-लब तबस्सुम
मैं उन लबों पर कभी तो देखूँ,
वो मुस्कुराहट जो मुस्कुराए

हयाते-फ़ानी से बढ़ के फ़ानी,
निगाहे-बर्को-शरर से कमतर
ये इश्क़ है तो सलाम अपना,
यही वफ़ा है तो बाज़ आए

तू इस तरह याद आ रहा है,
कि शामे-ग़म में मैं डर रहा हूँ
कहीं न आ जाए मेरे दिल में,
वो याद जो तुझको भूल जाए

हज़ारहा दिल तड़प-तड़प कर,
बयक अदा मिट के रह गये हैं
न पूछ क्या उन दिलों पे गुज़री,
जो रह गये थे बचे-बचाए

 

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