न जवान-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

न जवान-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

न जवान-
न बूढ़ा-
न जीवित-
न मरा-
पहचान खोया आदमी,
खाक हो चुका
खाक छानते-छानते!

रचनाकाल: २०-०६-१९९१

 

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