न घटा जो यहाँ कभी पहले-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

न घटा जो यहाँ कभी पहले-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

न घटा
जो यहाँ
कभी पहले
अब तो घटा-
नवाचार के नाम पर,
आदमी से आदमी कटा,
लोकतंत्र का
चोला फटा।

रचनाकाल: १०-०१-१९८०

 

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