न आना तेरा अब भी-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

न आना तेरा अब भी-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

न आना तेरा अब भी गरचे दिल तड़पा ही जाता है
तेरे जाने पे भी लेकिन सुकूँ-सा आ ही जाता है

न बुझने वाला शोला था कि नख्ले-इल्म का फल था
अभी तक दिल से इंसाँ के धुँआ उठता ही जाता है

ये भोली-भाली दुनिया भी सयानी है कयामत की
कोई करता है चालाकी,तो धोखा खा ही जाता है

न यूँ तस्वीरे-उजलत बन के बैठो मेरे पहलू में
मुझे महसूस होता है,कोई उठता ही जाता है

निखरता ही चला जाता है हुस्न आईना-आईना
अज़ल से दिल के साँचे में कोई ढलता ही जाता है

मोहब्बत सीधी-सादी चीज़ हो,पर इसको क्या कीजै
कि कोई सुलझी हुई गुत्थी कोई उलझा ही जाता है

मेरा ग़म पुरसिशों की दस्तरस से दूर है हरदम
मगर खुश हूँ कि जो आता है,कुछ समझा ही जाता है

दिले-नादाँ,मोहब्बत में ख़ुशी का ये भरम,क्या ख़ूब
तेरी इस सादगी पर हुस्न को प्यार आ ही जाता है

उलट जातीं हैं तदबीरें,पलट जातीं हैं तकदीरें
अगर ढूँढे नई दुनियाँ तो इंसाँ पा ही जाता है

 

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