नज़्म-तुम इतनी चुपचाप हो.. क्यूँ-भारत अंगारा मानु-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharat Angara Manu 

नज़्म-तुम इतनी चुपचाप हो.. क्यूँ-भारत अंगारा मानु-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharat Angara Manu

तुम इतनी चुपचाप हो.. क्यूँ..?
तुम खामोश जो रहती हो, सब कुछ तनहा सा लगता है..
लगता है सभी फूल भी अब मुरझा जायेंगे..
तुम खामोश हो तो जैसे मेरी आवाज़ कहीं गुम है..
मैं भी गुमसुम हो जाता हूँ..।

फिर तुम इतनी चुपचाप हो क्यों..?

ख़ामोशी अपने होंठों की इस क़ैद से अब आज़ाद करो..

अब और न यूँ परेशान रहो..
मैं भी तो हंसना चाहता हूँ,
इसलिए ज़रा अब तो हंस दो..।
(भारत अंगारा ‘मानु’-सिरसा (हरियाणा)

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