नज़्म-एक ख़्वाब ही थी तुम मेरे लिए-भारत अंगारा मानु-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharat Angara Manu 

नज़्म-एक ख़्वाब ही थी तुम मेरे लिए-भारत अंगारा मानु-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharat Angara Manu

एक ख़्वाब ही थी तुम मेरे लिए..

ख़्वाबों में ही बस देखा तुम्हें
वो हसीं ख़्वाब तुम्हें पाने के ..।

वाकिफ़ हूँ मैं इस बात से कि
तुमको मैं पा तो नहीं सकता..
पर ख़्वाबों में तुम्हे लाने से
मैं खुद को रोक नहीं सकता ..।

ख़्वाबों के हसीं ये लम्हें ही काफी हैं
खुश रहने के लिए..।

एक ख़्वाब ही थी तुम मेरे लिए
एक ख़्वाब ही हो तुम मेरे लिए..।।

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