नज़र-ए-हसरत मोहानी-ग़ुब्बार-ए-अय्याम -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

नज़र-ए-हसरत मोहानी-ग़ुब्बार-ए-अय्याम -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

मर जायेंगे ज़ालिम कि हिमायत न करेंगे
अहरार कभी तरके-रवायत न करेंगे

क्या कुछ न मिला है जो कभी तुझसे मिले थे
अब तेरे न मिलने की शिकायत न करेंगे

शब बीत गई है तो गुज़र जायेगा दिन भी,
हर लहज़ा जो गुज़री वो हिकायत न करेंगे

ये फ़िकर दिले-ज़ार का एवज़ाना बहुत है
शाही नहीं मांगेंगे विलायत न करेंगे

हम शैख़ न लीडर न मुसाहिब न सहाफ़ी
जो ख़ुद नहीं करते वो हिदायत न करेंगे

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