नज़रे-हाफ़िज़-शामे-श्हरे-यारां -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

नज़रे-हाफ़िज़-शामे-श्हरे-यारां -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

नासेहम गुफ़त बजुज़ ग़म चे हुनर दारद इश्क
बिरो ऐ ख़्वाज़ा-ए-आकिल हुनर-ए-बेहतर अज़ीं

कन्दे-दहन कुछ इससे ज़ियादा
लुतफ़े-सुख़न कुछ इससे ज़ियादा

फ़सले-ख़िज़ां में मुशके-बहारां
बरगे-समन कुछ इससे ज़ियादा

हाले-चमन पर तलख़े-नवाई
मुरग़े-चमन कुछ इससे ज़ियादा

दिलशिकनी भी, दिलदारी भी
यादे-वतन कुछ इससे ज़ियादा

शम्म-ए-बदन, फ़ानूसे-कबा में
ख़ूबी-ए-तन कुछ इससे ज़ियादा

इश्क में क्या है ग़म के अलावा
ख़्वाजा-ए-मन कुछ इससे ज़ियादा

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