न्याय से वंचित बच्चियाँ-कविता-दीपक शर्मा-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Sharma

न्याय से वंचित बच्चियाँ-कविता-दीपक शर्मा-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Sharma

 

देश में
बलात्कार रोकने की
चलाई जा रही है मुहिम
टेलीवीजन पर
खद्दरधारी लोग कर रहे हैं
अपनी सफलता का दावा
अखबारों में खबर के नाम पर
छप रहा सिर्फ विज्ञापन
और आये दिन
सड़क किनारे
मिलती है
बच्चियों की लाशें
पेट और पीठ पर नाखूनों के
बड़े-बड़े निशान
खून से लहूलुहान धरती
सब लोग देखते हैं
और मौन रहते हैं
धृतराष्ट्र अंधे होने की दुहाई देते हैं
गांधारी आँख की पट्टी नहीं खोलती
भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य
सत्ता की गुलामी करते हैं
शाम को जागरूक छात्रों द्वारा
इंडिया गेट से
निकाली जाती है कैंडिल मार्च
सोशल मीडिया पर
बुद्धिजीवी लोग जता देते हैं
दुःख भरी संवेदना
किंतु न अपराधी पकड़े जाते हैं
न अपराध बंद होता है
टेलीवीजन पर बैठें प्रवक्ता
लड़कियों के छोटे कपड़े
चेहरे की हँसी और मुस्कान
पर करते हैं छीटाकसी
देते हैं बेशर्मी भरी दलीलें।
बस बच्चियाँ न्याय से
रह जाती हैं वंचित
हर बार
स्कूल जाते समय
रहती हैं भयभीत
साइकिल चलाते हुए
काँपते हैं उनके हाथ
खूँखार इंसानी जानवरों पर
प्रतिबंध लगाने में
एंटी रोमियों स्क्वैड
असफल होता रहा है हर बार।

 

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