नेताओं की टोली फिर से निकली है बाजार में-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

नेताओं की टोली फिर से निकली है बाजार में-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

नेताओं की टोली फिर से निकली है बाजार में
पाँच सौ में बिकोगे यार या तुम हज़ार में
तोड़ने वाले सौदागर लग गए है व्यपार में
जाती में बटोगे या बटोगे धर्म के आधार पे
बहुरूपिये नेता ढल गए है अपने किरदार में
कोई बना किसान, कोई मजदूर इस त्योहार में
लग गए सब शिकारी अपने-अपने शिकार में
और हम भी झूम रहे उनके वादों के बौछार में

 

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