नीले-नीले से शब के गुम्बद में-कुछ और नज्में -गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

नीले-नीले से शब के गुम्बद में-कुछ और नज्में -गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

नीले-नीले से शब के गुम्बद में
तानपूरा मिला रहा है कोई

एक शफ़्फ़ाक काँच का दरिया
जब खनक जाता है किनारों से
देर तक गूँजता है कानों में

पलकें झपका के देखती हैं श’में
और फ़ानूस गुनगुनाते हैं
गुनगुनाती हैं बिल्लौर की बूँदें

तेरी आवाज़ पहन रखी है कानों में मैंने

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