नीला पीपल मेरा गीत-नज़्में -अली अकबर नातिक -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ali Akbar Natiq ,

नीला पीपल मेरा गीत-नज़्में -अली अकबर नातिक -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ali Akbar Natiq ,

दरिया के उस पार खड़ा है पीपल का जो नीला पेड़
जिस की रगों से दूधिया चानन किरणें बन कर छनता है
पत्ते खड़ खड़ करते हैं तो दर्द का बाजा बजता है
चारों ओर से पीली सरसों छम छम नाचने लगती है
बरसों पहले ज़ीना ज़ीना दूर आकाश के मंदिर से
मीठी धुप के मोती खा कर उतरा था इक भोला हन्स
सुबह रूपहला सूरज आता सर्द हिमाला के बन से
नूर के पानी से धोता वह, हन्स के सुर्ख़ सुनहरे बाल
नर्म हवाएँ टकराती थीं पीपल की जब शाखों से
छिड़ जाते थे दिल के अंदर नग़मों के कुछ बांके तार
मैं गीतों का शायर कहता दर्द भरे और मीठे गीत
हौले हौले गीत सुना कर हन्स का जी बहलाता था

मन मौजी के जी में आई इक दिन लौट के जाने की
सौ सौ मिन्नत कर के रोया, दिल का हटेला ना माना
रोज़ उडारी मार के आख़िर पोहंचा अपने ऊंचे देस
सोग में उस दन से बैठे हैं नीला पीपल मेरे गीत

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