नींद पूरे बिस्तर में नहीं होती-नज़्में -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

नींद पूरे बिस्तर में नहीं होती-नज़्में -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

नींद पूरे बिस्तर में नहीं होती
वो पलंग के एक कोने में
दाएँ
या बाएँ
कसी मख़्सूस तकिए की
तोड़-मोड़ में छुपी होती है
जब तकिए और गर्दन में
समझौता हो जाता है
तो आदमी चैन से
सो जाता है

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