नींद आई भी न आई-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

नींद आई भी न आई-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

नींद
आई भी न आई,
और मैं
सोता हुआ
जगता रहा,
ओस बूँदों में
झलकते
सूर्य को
लखता रहा।

रचनाकाल: १३-०८-१९९०

 

 

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