निर्लज्य नाटक (देवनागरी रूप)-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun 

निर्लज्य नाटक (देवनागरी रूप)-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

राजनीति होयेछे सम्प्रति निर्लज्यो नाटक
आमियो कोरेछि यत्र-तत्र अनेक त्राटक
कोथाओ अध्यक्ष एवं कोथाओ उद्घाटक
खुले दियेछि शत शत महामुक्तिर फाटक

(5.11.78)

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