निरंतर बना रहेगा-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

निरंतर बना रहेगा-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

 

निरंतर बना रहेगा
जीवंत और विकासमान
ऐतिहासिक
द्वन्द्वात्मक
भौतिकवाद।
नासमझ हैं वे
जो समझते हैं इसे मरा हुआ
कुटिल काल से कवलित हुआ।
यही है, यही है
महान मानवीय मूल्यों का
परम वैज्ञानिक बोध का बोधक
चिरंतन और चिरायु चेतना से
सृष्टि का शोधक।
शेष जो वाद-ही-वाद हैं-
जैसे आत्मवाद
परमात्मवाद, अध्यात्मवाद,
और भी कई-कई वाद-
निरर्थक हो चुके हैं सब
महान मानवीय मूल्यों के लिए,
सभ्य और सांस्कृतिक
विकास के लिए
विश्वबंधुत्व के लिए।

रचनाकाल: ०४-१०-१९९०

 

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